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रंग

हीरे के रंग के श्रेणीकरण का प्रचलित अर्थ हीरे की रंगहीनता है, अर्थात यह श्रेणी हीरे की रंगहीनता को व्यक्त करती है। रंगहीनता के कारण हीरे से अधिक रोशनी गुज़रती है, जिससे प्रिज़्म प्रभाव उत्पन्न होता है और हीरे को इसकी चमक मिलती है।
आज व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला, मानक रंग श्रेणीकरण D (रंगहीन) से Z (हल्का पीला) के बीच है जो अमरीकी रत्नवैज्ञानिक संस्थान (Gemological Institute of America – GIA) द्वारा स्‍थापित है। किसी हीरे को उसके रंग के अनुसार वर्गीकृत करने की प्रक्रिया व्यावसायिक हीरा श्रेणीकरणकर्ताओं द्वारा संचालित की जाती है जो मूल्यांकित हीरे की ज्ञात रंग वाले हीरों से तुलना करते हैं।
हमारे यहाँ भिन्न रंग श्रेणियों वाले हीरे हैं, पर हमारे अधिकाँश हीरे D और M के बीच वर्गीकृत हैं।