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5C's

हीरों की उत्पत्ति लगभग 3 बिलियन वर्ष पहले पृथ्वी की सतह से 150 कि.मी. नीचे हुई थी, जहाँ उनकी रचना के लिए आवश्यक समुचित दबाव और तापमान मौजूद होता है।

ज्वालामुखी के फटने और इसके परिणामरूप हीरों के सतह पर आ जाने के कारण आज हीरे खानों में पाए जा सकते हैं। फिर भी, इस 1 ग्राम दुर्लभ खनिज को पाने के लिए 1500 टन अयस्क (ore) का खनन करना पड़ता है।

‘डायमंड’ शब्द, यूनानी शब्द ‘अदामा’ से बना है जिसका अर्थ ‘अजेय’ होता है और कड़ेपन और सुन्दरता – दोनों के मामले में हीरे नि:संदेह अजेय खनिज हैं।

हीरों को पाँच Cs के अनुसार वर्णित और वर्गीकृत किया जाता है:

हीरों का तराशा जाना (Cut), जिससे उनकी चमक निर्धारित होती है, उनका कैरट (Carat) वज़न, उनका रंग (Color) या अगर सटीक रूप से कहा जाए, तो उनकी रंगहीनता; उनकी स्पष्टता (Clarity) जिसे बड़ा करके देखने पर दोषों की संख्या द्वारा मापा जाता है; और उपभोक्ता का विश्वास (Consumer Confidence), इस बात का आश्वासन देना कि हीरों का उपयोग किसी अवैध और हिंसक कार्यकलाप के लिए धन उपलब्ध करवाने के लिए नहीं किया गया है।

हालांकि यह बहुत महत्वपूर्ण लगता है, पर अकेले कैरट वज़न से हीरे का मूल्य निर्धारित नहीं होता; 5 Cs में से प्रत्येक हीरे के मूल्य को अत्यधिक प्रभावित करता है, इसलिए गज़ब की स्पष्टता वाला, अच्छी तरह तराशा हुआ और उच्च रंग श्रेणी वाला हीरा, कमज़ोर स्पष्टता, तराश और रंग विशेषताओं वाले बड़े हीरे की तुलना में काफी मूल्यवान होता है।